जीवनयात्रा

मेरा ब्लू हिल पब्लिकेशन्स से प्रकाशित होने बाला प्रथम कविता संग्रह ‘जीवनयात्रा’ शीघ्र ही आपके हाथों में होगा. इसके शीर्षक एवं फ्रंट कवर से ही आप इसके विषय से अवगत हो गए होंगें. जन्म से मृत्यु तक और इसके बाद परलोक का सफर. यह है जीवनयात्रा का अनवरत क्रम. इसी जीवनयात्रा के विभिन्न आयामों को यह कविता संग्रह छूता है. जब आप इस यात्रा में सम्मिलित होंगे तब आप इसके आनन्द के साथ साथ इसकी सत्यता को भी जानेंगे. आप जीवन के किसी भी पडाव पर हों, यह कविता संग्रह आपको जीवन की सही राह पर ले जाएगी. मैं साई भक्त हूं इसलिए यह कविता संग्रह साई को समर्पित है.

ऊँ साई राम!

मैं बिहार हूं

अशोक का बिहार हूं
बुद्ध का विहार हूं
महावीर की जन्मभूमि
अहिंसा का सूत्रधार हूं

बिहार दिवस 22 मार्च

नालन्दा का संस्कार हूं 
विक्रमशिला का आधार हूं
सम्पूर्ण क्रांति के जनक
जेपी का विचार हूं

आम्रपाली का श्रंगार हूं
घुंघरुओं की झंकार हूं
सौन्दर्य की प्रतिमा
आम्रपाली का कंठहार हूं
मैं बिहार हूं.

अहसास

अहसास
जिन्दगी में कइ बार उम्र का पानी
बहने लगता है खतरे के निशान के बहुत करीब
लगता है कि अब पार हुआ तब पार हुआ
पर वक्त जैसे ठहर जाता है
और पानी रुक जाता है खतरे के निशान पर
छंटने लगते हैं कष्ट के बादल
और थम जाती है वक़्त की बरसात
पानी लगता है उतरने खतरे के निशान से 
और जिन्दगी लौट आती है पटरी पर
यह होता है जिन्दगी में कइ बार
एक बुरा सपना समझ कर भूल जाते हैं हम
जबतक वक्त हमें बता नही जाता अपनी औकात
एक बार फिर आता है वक्त का जलजला
और डगमगाने लगती है जिन्दगी की नाव
भंवर में समाने को तत्पर है जीवन की नौका
पर अचानक कोई हाथ बन जाती है पतवार
और खुलती है जब मेरी आंखें
तो मैं पडा होता हूं किनारे पर बेसुध और निढाल
कितना सुखद अहसास है
मौत के शिकंजे से वापस लौटना

अहसास

सोन चिरैया

एक नन्ही सी सोन चिरैया
फुदकती रहती डाल डाल पर
कभी इस डाल पर
कभी उस डाल पर
अपनी नियति से अनजान 
बुनती सपनों का संसार 
हवा के हिंडोले पर सवार 
नन्हे परों की पालकी मे
डोलती आजादी के नशे में
फूलों के उपवन मे
निहारती रंग बिरंगी तितलियां
और कानों मे मधुर संगीत घोलती
झूलों पर बच्चों की किलकारियां
आकाश को जब तब निहारती
और करती बूंदों का इन्तजार

नियति के चक्र ने चली चाल 
एक बहेलिए की पडी उसपर नजर 
और आंखों में कौंध गयी
पाशविकता की चमक
भांप गयी सोन चिरैया
बहेलिए की पाशविकता
याद आयी उसे मां की सीख 
बहेलिए से बचने की तरकीब 
नन्हे परों से उडी सोन चिरैया
और बहेलिए की आंखों पर मारी चोंच
एक पल हतप्रभ रहा बहेलिया
चुभती आंखें लिए मौन खडा रहा
सूय॔ पश्चिम मे अस्त होता रहा
सोन चिरैया की आंखों में
साहस का उजाला फूटता रहा
कितने भी हों वहशी बहेलिए  
हिम्मत की हो ढाल साथ 
तो बहेलियों की फूटती आंखें 
और दोबारा न करता प्रयास ।
जयप्रकाश अग्रवाल 

सोन चिरैया

Shivratri is an auspicious occasion when Lord Shiva married Parvati, the Shakti. Shivaratri is celebrated to mark the union of Purusha and Skakti. Shivlinga symbolizes this union. Worship of Shiva is done by belpatra, milk, honey, flower . Linga is symbol of God as a spark or source of light.

Aum Namah Shivay

खिलौना
तुम तो दिल तोडने में माहिर हो
शायद तुम्हारा दिल अभी नही टूटा
बच्चे खिलौने तोड़ने में माहिर हैं
पर तुम तो बच्चे नही हो

खिलौना

खयाल

खयाल
हमने तुम्हे कहाँ गैर कहा
तुमने ही हमें गैर बना दिया
तुम पर मेरा इख़्तियार नही
पर खयाल तो मेरा अपना है

मैने खुद को घाव दिए
तुमसे दिल लगाकर
अब तुम्हारे खयाल से
मरहम लगा रहा हूं

तुम औरों के लिए मर गए हो
पर मेरे खयालों में जिन्दा हो