सोने की चिडिया

हमने अपने बुजुर्गों से एक कहानी सुनी है
एक सोने की चिडिया थी
जिसके परों को विदेशियों ने नोच लिया
और हमने ही उन्हे सौंप दिया
आज सोने की चिडिया कहीं नही दिखती
कुछ महाजनों की चारदिवारी में
पिंजड़े मे बन्द हैं सोने की परें
जिन्हे देश के चौकिदारों ने
दिया है उन्हे उपहार
बांकी घरों मे
सोने की चिडिया की
वापसी का है इन्तजार ।
Advertisements

आना और जाना

कोई आता है कोई जाता है
ज़िन्दगी का सफर यूं ही कट जाता है।
हम सब आए हैं खाली हाथ यहां
जो कुछ जोडा सब यहीं रह जाता है।
मेहमान हैं हम सब कुछ दिनों के
जो किया वही साथ जाता है।
कुछ चलते हैं कुछ साथ छोड जाते हैं
आगे या पीछे हर कोई बिछड़ जाता है।
ज़िन्दगी से शिकवा न करो ऐ दोस्त
आखिर मे प्राण तन से निकल जाता है।

मौसम का मिजाज

मौसम के मिजाज कुछ बदले से लगते हैं।

कभी मेहरबान तो कभी अनजान से लगते हैं।

हमने ही उन्हे नाराज कर दिया शायद

वर्ना तो वे हमेशा हमारा खयाल रखते हैं।

मेरे ऑंसू मेरे अपने हैं।

मेरी आंखों मे बादल उमडते घुमडते हैं
और ऑंसू बनकर बरस जाते है।
यह सब कुछ कभी कभी होता है।
मेरे आंसू मेरे अपने हैं
जो मेरे मन को हल्का कर जाते हैं।
यहां आंसुओं की भी कीमत होती है
जो पोंछकर या और बहा कर
वसूल की जाती है
इसलिए मेरे आंसू
औरों के सामने नही बहते
ये अपने आप सूख जाते हैं।
मेरे ऑंसू किसी को हमदर्दी
जताने का अवसर नही देते
एक प्रकार से कहें
तो चाटुकार मेरे चारों तरफ नही रहते
मेरे दोस्तों को शिकायत है
कि मैं कभी रोता क्यों नही ?
अब क्या बताएं
कि हम चुपके चुपके क्यों रोते हैं?

एकला चलो रे

दुनिया मे सब अकेले चलते हैं।
यह और बात है
कि सब साथ हो लेते हैं।
अकेलापन इतना नही चुभता
जितना भीड सताती है।
पब॔त सदियों से अकेले खडे हैं।
नदियां निरबरत बह रही हैं।
पृथ्वी भार ढो रही हैं।
वायु निरबरत बह रही है।
सब अकेले हैं।
अकेले हम आए हैं
अकेले हम जायेंगे
यह और बात है कि
हम क्या निशानी छोड जायेंगें ।